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पूर्व मंत्री और आरजेडी नेता बागी कुमार वर्मा का निधन, दिल्ली AIIMS में ली अंतिम सांस

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बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और आरजेडी नेता बागी कुमार वर्मा का दिल्ली AIIMS में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे तीन बार विधायक रहे और लालू सरकार में मंत्री पद संभाल चुके थे।

पटना/आलम की खबर: बिहार की राजनीति से मंगलवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता Bagi Kumar Verma का निधन हो गया। दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences में इलाज के दौरान उन्होंने सोमवार देर रात अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही बिहार के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थकों, कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है।

जानकारी के अनुसार, बागी कुमार वर्मा पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज दिल्ली एम्स में चल रहा था। सोमवार देर रात करीब 12:40 बजे उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद परिवार और समर्थकों में शोक का माहौल है। मंगलवार को पटना में उनका अंतिम संस्कार किए जाने की तैयारी की गई है, जहां बड़ी संख्या में राजनीतिक नेताओं और समर्थकों के पहुंचने की संभावना है।

बागी कुमार वर्मा बिहार की राजनीति का एक जाना-पहचाना चेहरा थे। वे लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में रहे और अपने स्पष्ट बयानों तथा जमीनी पकड़ के कारण अलग पहचान रखते थे। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री और समाजवादी नेता Upendra Nath Verma के पुत्र थे। पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने भी सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राजनीतिक जीवन में बागी कुमार वर्मा ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन जनता के बीच उनकी पकड़ लगातार बनी रही। वे तीन बार विधायक निर्वाचित हुए। उन्होंने जहानाबाद जिले की मखदुमपुर विधानसभा सीट से दो बार जीत हासिल की थी। इसके अलावा अरवल जिले की कुर्था विधानसभा सीट से भी वे विधानसभा पहुंचे। ग्रामीण राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें मगध क्षेत्र में मजबूत जनाधार दिलाया था।

अपने राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने Lalu Prasad Yadav की सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली। मंत्री रहते हुए उन्होंने कई विभागों में काम किया और संगठन स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाई। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वे उन नेताओं में शामिल थे जो सीधे जनता से जुड़े रहते थे और क्षेत्रीय मुद्दों को खुलकर उठाते थे।

बागी कुमार वर्मा का राजनीतिक सफर केवल एक दल तक सीमित नहीं रहा। समय-समय पर उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों में भी काम किया। वर्ष 2014 में उन्होंने Janata Dal (United) के टिकट पर औरंगाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि उस चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी नहीं बनाई। बाद में वर्ष 2019 में उन्होंने जदयू छोड़कर दोबारा Rashtriya Janata Dal का दामन थाम लिया।

इसके बाद 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने कुर्था सीट से आरजेडी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उस जीत को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना गया था। क्षेत्रीय राजनीति में उनकी वापसी को एक मजबूत संदेश के रूप में देखा गया। चुनाव के दौरान भी उन्होंने ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।

बागी कुमार वर्मा को एक जमीनी नेता माना जाता था। उनके समर्थकों का कहना है कि वे हमेशा गरीबों, किसानों और वंचित वर्गों की आवाज उठाते रहे। मगध क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद उनके समर्थकों का आधार मजबूत बना रहा। वे आम लोगों के बीच सहज तरीके से संवाद करने वाले नेताओं में गिने जाते थे।

उनके निधन पर कई राजनीतिक नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। बिहार सरकार और विभिन्न दलों के नेताओं ने इसे राज्य की राजनीति के लिए बड़ी क्षति बताया है। नेताओं ने कहा कि बागी कुमार वर्मा का अनुभव और राजनीतिक समझ बिहार की राजनीति में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।

मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा कि पूर्व मंत्री बागी कुमार वर्मा के निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

सोशल मीडिया पर भी उनके निधन को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। समर्थक उन्हें संघर्षशील और जनप्रिय नेता बता रहे हैं। कई लोगों ने उनके साथ बिताए राजनीतिक और सामाजिक अनुभवों को साझा करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बागी कुमार वर्मा के निधन से खासकर मगध क्षेत्र की राजनीति में एक खालीपन महसूस किया जाएगा। वे उन नेताओं में थे जिनकी पहचान केवल राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं थी, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी उनकी मजबूत पकड़ थी। क्षेत्रीय राजनीति में उनकी भूमिका को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

फिलहाल उनके निधन के बाद बिहार की राजनीति में शोक का माहौल है। पटना से लेकर अरवल, जहानाबाद और मगध क्षेत्र तक उनके समर्थकों में दुख और भावुकता देखी जा रही है। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।

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